Bihar And Orissa Public Demand Recovery Act 1914 Pdf In Hindi Page
बिहार और उड़ीसा सार्वजनिक मांग वसूली अधिनियम 1914, सरकार के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली उपकरण है। 2026 तक, इसमें समय-समय पर संशोधन किए गए हैं, विशेष रूप से झारखंड राज्य के गठन के बाद, जहां सर्टिफिकेट ऑफिसर की परिभाषा में सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक कोष का दुरुपयोग न हो और बकायेदार अपनी देनदारियों से न भाग सकें।
देनदार को गिरफ्तार करना और सिविल कारागार में रखना (30 दिन से लेकर 6 महीने तक, बकाया की राशि के आधार पर)।
बिहार एंड उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट 1914 PDF हिंदी में कैसे प्राप्त करें?
बिहार और उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट, 1914, आजादी से पहले बना एक कानून होने के बावजूद आज भी अत्यधिक प्रासंगिक है। सरकारी राजस्व को सुरक्षित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। इस अधिनियम की हिंदी PDF प्राप्त करने के लिए उपरोक्त स्रोतों का उपयोग करें, लेकिन हमेशा याद रखें कि कानून की पेचीदगियों को समझने और किसी विशिष्ट मामले में सलाह के लिए किसी योग्य वकील से संपर्क करना सबसे उचित होगा। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है, न कि इसे कानूनी राय के रूप में लिया जाए।
गंभीर मामलों में, देनदार की गिरफ्तारी और दीवानी जेल (Civil Prison) में हिरासत।
देनदार को नोटिस दी जाती है कि वह 30 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कर सकता है। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो सर्टिफिकेट फाइनल मान लिया जाता है।
: You can find bilingual (English/Hindi) versions of state-specific amendments, such as the
यह भारत सरकार का आधिकारिक डिजिटल रिपोजिटरी है जहां 'Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act, 1914' सर्च करके इसके हिंदी अनुवाद या राज्य संशोधनों की कॉपी खोजी जा सकती है।
वसूली की प्रक्रिया: सर्टिफिकेट केस (Certificate Case)
नहीं, यह केवल सरकारी सार्वजनिक देय (Public Demands) के लिए है।
बकाया राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
Provision to challenge the officer's decision in a higher court. ⚖️ Modern Context & Legal Reviews Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914
Section 60 of the Act allows for an appeal against the orders passed by the Certificate Officer.
जब कोई विभाग या बैंक किसी बकायेदार से पैसा वसूलने में असमर्थ होता है, तो वह संबंधित जिले के के पास एक मांग पत्र भेजता है। यदि सर्टिफिकेट ऑफिसर संतुष्ट होता है कि राशि बकाया है, तो वह धारा 4 या धारा 6 के तहत एक "सर्टिफिकेट" (प्रमाण पत्र) तैयार करता है और उस पर हस्ताक्षर करता है।
बिहार एंड उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट, 1914 (Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act, 1914) पूर्वी भारत के कानूनी इतिहास और राजस्व प्रशासन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह कानून ब्रिटिश काल में सरकारी बकाये और सार्वजनिक मांगों (Public Demands) की त्वरित वसूली के लिए बनाया गया था। आज भी बिहार, झारखंड और उड़ीसा जैसे राज्यों में इस कानून का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
The debtor can file a petition denying their liability for the debt. सुनवाई और निर्णय
सर्टिफिकेट केस की प्रक्रिया (The Certificate Procedure)